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अब मुरादाबाद के किसानों को उजाडने की तैयारी
Tags: Moradabad Farmers, MDA, Agriculture land acqisition in Pakbara village of district Moradabad
Publised on : 2011:06:14       Time 09:43                     Update on  2011:06:14      Time 09:43

-मायावती सरकार ने जारी की 5 सौ एकड़ उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना
- प्रभावित होंगे एक हजार किसान परिवार, अधिकांश लघु और सीमांत किसान
- नया मुरादाबाद का पहला फेस विकसित नहीं दूसरे के लिए अधिग्रहण
मुरादाबाद, 14 जून। (उ.प्र.समाचार सेवा ब्यूरो)। भूमि अधिग्रहण और किसान उत्पीड़न को लेकर आलोचना झेल रही मायावती सरकार ने अब यहां की खेती पर ग्रहण लगा दिया है। खेती किसानी की चिंता किये बगैर सरकार के निर्देश पर मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने जिले के किसानों को तबाह करने की तैयारी कर ली है। प्राधिकरण जिले की सदर तहसील में 500 एकड़ कृषि भूमि अधिग्रहण करने जा रह  है। किसानों से सहमति लिये बगैर शासन ने धारा चार की कार्रवाई करके अधिसूचना जारी कर दी है। इससे जिले के किसानों में आक्रोश है। किसान अधिग्रहण के खिलाफ बड़े आन्दोलन की तैयारी कर रहे हैं।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने नया मुरादाबाद योजना के फेज दो के लिए सदर तहसील की ग्राम सभा पाकबड़ा की 497.10 एकड़ खेती की जमीन अधिग्रहण करने के लिए शासन को गुपचुप तरीके से प्रस्ताव भेज दिया था। इस प्रस्ताव को भेजने से पहले न तो किसानों से सहमति ली गई और न ही कोई सार्वजनिक सूचना जारी की गई। इस प्रस्ताव के आधार पर उ.प्र.सरकार के आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 ने विज्ञप्ति संख्या 5529 8-3-2010-35 एल.ए. 2010 दिनांक 18 जनवरी 2011 का विज्ञापन 5 जून 2011 को अमर उजाला के मुरादाबाद संस्करण में प्रकाशित करा दिया है। इस विज्ञापन के अनुसार ग्राम सभा पाकबड़ा की समस्त कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया है। शासन ने अपनी विज्ञप्ति में उल्लेख किया है कि शहर के सुनियोजित आवासीय विकास योजना के लिए भूमि अधिग्रहीत की जा रही है। कृषि भूमि का अधिग्रहण भूमि अर्जन अधिनियम 1894 की धारा -4 की उपधारा (1) के अधीन किया गया है। इस अधिग्रहण से ग्राम सभा के करीब एक हजार किसान परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
अधिग्रहण के संबंध में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण और आवास एंव शहरी नियोजन विभाग ने गलत तथ्य प्रस्तुत किये हैं। इनका कहना है कि मुरादाबाद में आवासीय योजना के लिए भूमि की आवश्यकता है। जबकि नया मुरादाबाद योजना के पहले चरण के लिए अधिग्रहीत की गई करीब पांच सौ एकड़ जमीन अभी तक न तो विकसित की गई है और न ही इस पर आवास बने हैं। पूरा नया मुरादाबाद खाली पड़ा है। कई सेक्टर ऐसे हैं जिनका अभी तक एमडीए विक्रय भी नहीं कर सका है। हां इतना अवश्य है कि एमडीए ने कुछ दिल्ली के नामचीन बिल्डर्स को इस योजना की प्राइम लैंड बेच दी, जोकि दिल्ली रोड पर थी। किसानों की जमीन बिल्डस को बेचकर प्राधिकरण भारी मुनापा कमाया। इस पर बिल्डर्स फ्लैट बनाकर मोटी कमाई करने की तैयारी मै है। बस्तुत: मुरादाबाद में लोगों की आवश्यकता उतनी नहीं है जितना प्राधिकरण प्रचारित करता है। यहां लोग आवासीय योजनाओं में धन इंवेस्ट करने के लिए प्लाट लेकर डाल रहे हैं। यदि वास्तव में आवासों की आवश्यकता होती तो अभी तक नया मुरादाबाद आबाद हो जना चाहिए था। एमडीए किसानों से 200 रूपये मीटर जमीन लेकर छह हजार रूपये मीटर बेच कर मुनाफा कमा रहा है। नया मुरादाबाद मे प्राधकरण अभी तक अपनी जमीन बेच भी नहीं सका है कई सेक्टर अभी तक विक्रय का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में यह कहना बेमानी है कि मुरादाबाद में आवासीय प्रयोजन के लिए पांच सौ एकड़ और भूमि की आवश्यकता है।
यहां यही हाल आवास एवं विकास परिषद् की योजनाओं का है। दिल्ली रोड पर ही आवास विकास की बुद्दि विहार फेज दो और तीन के लिए भी भूमि अधिग्रहीत की गई है। यह जमीन भी अभी तक आवासीय प्रयोजन के लिए आबंटित नहीं हो सकी है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि मुरादाबाद में अभी नया मुरादाबाद योजना दो के लिए भूमि अ्धिक्हण की आवश्यकता नहीं थी। लेकिन एमडीए ने हठधर्मी का परिचय देते हुए अधिग्रहण की कार्रवाई शुरु करा दी है। इससे स्थानीय किसानों मे ंआक्रोश पनप रहा है। संघर्ष समिति बनाकर किसान आन्दोलन की तैयारी कर रहे हैं। वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं है। जमीन अधिग्रण की कार्रवाई बलपूर्वक किये जाने पर यहां भी उग्र संषर्ष की आशंका है। हालांकि जिला प्रशासन और प्राधिकरण के अधिकारी किसानों के आक्रोश से बेखबर हैं।
अधिग्रहण उस जमीन का किया जा रहा है जोकि अत्यधिक उपजाऊ है। इसमे किसान तीन फसलें लेते हैं। अधिकांश किसान लघु और सीमांत जोत के हैं। यह समस्त कृषि भूमि सब्जी पट्टी है। यहां सब्जियों का उत्पादन होता है जिससे मुरादाबाद नगर की सब्जी की आवश्यकता की पूर्ति होती है। इस भूमि के अधिग्रहीत होने से करीब एक हजार किसान परिवार भूमिहीन हो जाएंगे। इनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा। लेकिन मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने जमीन अधिग्रहण के लिए प्रस्ताव तैयार करने से पहले इस तथ्य को कतई भी ध्यान में नहीं रखा कि छोटे किसान परिवार कहां जाएंगे। प्रभावित होने वाले किसान पारिवारों में बहुतायत सैनी जाति की है। विधान सभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भी सैनी जाति का व्यक्ति ही करता है। यहां से गत चुनाव में सत्तारूढ़ बसपा ने जीत दर्ज की थी।
कृषि अधिग्रहण उसी केन्द्रीय भूमि अधिग्रहण कानून 1894 के तहत किया जा रहा है जिसे केन्द्र सरकार संशोधित करने जा रही है। केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अभी हाल में जारी एक वक्तव्य में स्पष्ट किया है कि संसद के मानसून सत्र में नया भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम पारित कराया जाएगा। लेकिन प्रदेश सरकार ने इस अधिनियम के संशोधन का भी इंतजार नहीं किया और पुराने उसी कानून से अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी कर दी जिसमें तमाम खामियां हैं। इस कानून की खामियों को लेकर ही जगह-जगह अधिग्रहण से जुडे विवाद और संघर्ष हो रहे हैं। लेकिन प्रदेश सरकार किसी भी घटना से सबक लेने को तेयार नहीं है।

Summary: Moradabad Devlopment Aauthority (MDA) is going to start acqisition of 500 acare agriculture land in Pakbara village situated on Delhi-Lucknow National Highway NH 24, Farmer reddy to agitation
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