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हार चुके हैं दिग्गज नए प्रत्याशियों से
Tag: Election Enalysis
Publised on : Last Updated on: 10 February  2017, Time 19:35

श्रीधर अग्निहोत्री

लखनऊ। कहा जाता है कि चुनाव की राह बड़ी ही रपटाऊ और टेढ़ी मेढी होती हैएक संभलकर चलने वाले भी रपट जाते हैं चाहे वह कितनी भी बड़ा दिग्गज क्यों न हो। अब यूपी की राजनीति को ही लीजिए यहां लोकसभा और विधानसभा के चुनावों में कई बार ऐसे मौके आए कि बड़े से बड़े दिग्गज को भी हार का मुंह देखना पड़ा। आइए देखते हैं ऐसे ही कुछ दिग्गजों को जो राजनीति की इन रपटीली राहों में फिसल गए और सदन की चौखट तक नहीं पहुंच पाए। 

पहले हम जिक्र करते है लोकसभा चुनाव में हारे हुए दिग्गजों का
विश्वनाथ प्रताप सिंह
आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनाव में इलाहाबाद से कांग्रेस के वीपी सिंह जनता पार्टी के युवा चेहरे के रूप् में अपनी पहचान रखने वाले जनेष्वर मिश्र छोटे लोहिया से चुनाव हार गए थें। जिसके बाद देश  की राजनीति में जनेष्वर मिश्र का कद काफी बढ गया। 
हेमवती नन्दन बहुगुणा
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए 1984 के लोकसभा चुनाव में फिल्म स्टार अमिताभ बच्चन ने हेमवती नन्दन बहुगुणा को चुनाव में ष्किस्त दी। अमिताभ बच्चन को राजनीति का ककहरा भी नहीं आता था जबकि बहुगुणा सीएम से लेकर केन्द्र में मंत्री तक रह चुके थें। परन्तु जब वह चुनाव हारे तो कांग्रेस से अलग हो चुके थें। 
अटल विहारी वाजपेयी
यूपी की राजनीति में अपना अलग मुकाम रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री लखनऊ लोकसभा सीट से तीन बार चुनाव जीते और प्रधानमंत्री बने। इसके पहले भी वह कई बार लोकसभा चुनाव जीतचुके थे लेकिन 1984 में इंदिरागाधीं की हत्या के बाद हुए चुनाव में जब वह ग्वालियर में कांग्रेस के युवा नेता माधवराव सिंधिया ने उन्हे चुनाव में हराकर सनसनी फैला दी थी। 
जनेश्वर  मिश्र
प्रख्यात समाजवादी चिंतक जनेष्वर मिश्र भी 1984 के लोकसभा चुनाव में चन्द्रषेखर से हार गए जबकि इसके पहले वह 1972 1974 और 1977 का चुनाव जीतते आ रहे थें। 
रामनरेश यादव
पुराने दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व रामनेरष यादव 1977 का लोकसभा चुनाव जीते। यूपी का मुख्यमंत्री बनने के बाद वह निधौली कलां से विधायक बने। फिर षिकोहाबाद और फूलपुर से विधायक बने। परन्तु 1998 में वह बसपा के  अकबर अहमद डम्पी से वह लोकसभा का चुनाव हार गए। 
चौ अजित सिंह 
पश्चिमी  यूपी में किसान राजनीति का पर्याय कहे जाने वाले चौ अजित सिंह 1986 में राज्यसभा, 1989 1991 1996 में बागपत लोकसभा चुनाव लगातार जीतते रहने के बाद भाजपा के सोमपाल षास्त्री से 1998 का लोकसभा चुनाव हार गए। 
डा मुरली मनोहर जोशी 
अटल सरकार के समय जब 2004 में लोकसभा के चुनाव हुए तो तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री डा मुरली मनोहर जोशी को भी इलाहाबाद संसदीय सीट से हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद डा जोषी को इलाहाबाद छोडना पडा और वह वाराणसी और फिर कानपुर से सांसद बने। 

 

अब बात करते हैं विधानसभा चुनाव की

 

पिछला विधानसभा (2012) ऐसा चुनाव था जिसमें कई दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा था। इसे दिग्गजों की हार वाला चुनाव कहा जाए तो अतिषयोक्ति नहीं होगी। 
चन्द्रभानु गुप्ता
यूपी के तीन बार मुख्यमंत्री रहे चन्द्रभानु गुप्ता मुख्यमंत्री रहते हुए जब हमीरपुर से चुनाव लडे़ तो उन्हे एक निर्दलीय महिला प्रत्याषी ने चुनाव हरा दिया था। 
राजनाथ सिंह
केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह यूपी की राजनीति का एक जाना माना बड़ा चेहरा हैं। 1977 में पहली बार विधायक बनने के बाद 1988 में विधानपरिषद सदस्य चुने गए। इसके बाद कल्याण सिह सरकार में षिक्षामंत्री बने। लेकिन 1993 में तो राजनाथ िंसह लखनऊ की महोना सीट से समाजवादी पार्टी के नए चेहरे राजेन्द्र यादव से चुनाव हार गए। 
चौ नरेन्द्र सिंह
चौ नरेन्द्र सिंह यूपी की राजनीति में तूती बोलती थी। चौ नरेन्द्र सिंह विधानसभा के तीन चुनाव जीत चुके थें लेकिन 2002 के विधानसभा चुनाव में जब वह अपनी परम्परागत सीट चौबेपुर से लडे तो राजनीति के नवयुवक महेष त्रिवेदी ने उनको हराकर पांचवे स्थान पर ढकेल दिया। 
केशरी  नाथ त्रिपाठी
1977 में पहली बार यूपी सरकार में मंत्री बने केषरी नाथ त्रिपाठी इसके बाद भी 1991 1993 1996 व 2002 का विधानसभा चुनाव जीतते रहे लेकिन 2007 के विधानसभा चुनाव में वह अपनी परम्परागत सीट इलाहाबाद दक्षिण में नए युवक नंदगोपाल नंदी से चुनाव हार गए।
हरिशंकर  तिवारी
गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा से छह बार विधायक बनने वाले पं हरि शंकर  तिवारी को 2007 में उस समय झटका लगा कि जब पत्रकार से नेता बने युवक राजेश  पति त्रिपाठी ने बहुजन समाज पार्टी से चुनाव मैदान में उतरकर श्री तिवारी को शिकस्त  दी। 
माता प्रसाद पाण्डे
यूपी विधानसभा के अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय इटवा सीट से विधायक हैं। वह लगातार छह बार से इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते आ रहे हैं लेकिन 2014 में जब वह लोकसभा का चुनाव लडे तो उन्हे हार का मुंह देखना पडा। 
अमिता सिंह 
अमेठी राजघराने की दूसरी बहू अमिता सिंह अमेठी सीट से लगातार तीन बार विधायक बन चुनाव जीतती आ रही थी लेकिन 2012 का विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के गायत्री प्रजापति से हार गयी थी। 
लल्लू सिंह
फैजाबाद की अयोध्या सीट से लगातार चुनाव जीतते आ रहे लल्लू सिंह को पिछली बार के विधानसभा चुनाव में जबरदस्त झटका छात्रनेता पवन पाण्डेय ने दिया जब पवन ने सपा के टिकट पर चुनाव लडकर लल्लू सिंह को हराया। 
सुखदेव राजभर
पिछले विधानसभा चुनाव में ही बसपा सरकार के दौरान विधानसभा उपाध्यक्ष रहे और वरिष्ठनेता सुखदेव राजभर को उनकी विधानसभा दीदारगंज में नये चेहरे सपा के आदिलषेख ने हराकर सबको अचम्भित कर दिया था। 
सूर्य प्रताप षाही
जनसंघ के जमाने से राजनीति करने वाले सूर्य प्रताप शाही  जब पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदेष अध्यक्ष थे और उन्होने देवरिया के पथरदेवा से चुनाव लड़ा तो सपा के शाकिर  अली ने उनको चुनाव हराकर लगातार बढ रहे उनके विजय रथ को रोक दिया था। 
अतीक अहमद 
बाहुबली विधायक के रूप् में अपनी पहचान बनाने वाले अतीक अहमद बसपा कार्यकर्ता  राजूपाल की हत्या का आरोप 2006 में लगा। इसके बाद जब 2007 में विधानसभा चुनाव हुए तो स्व राजूपाल की पत्नी  पूजा पाल (25) ने तीन बार के विधायक अतीक अहमद को चुनाव में शिकस्त  दी।
   
   
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News source: UP Samachar Sewa

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