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कौन सुनेगा बांग्लादेशी हिंदुओं की आवाज ? 
मृत्युंजय दीक्षित

Mritunjay Dixit मृत्युंजय दीक्षित भारत की राजनीति अल्पंख्यकवाद पर टिकी हुई है। लोकसभा व विधानसभा चुनाव आते ही सभी दल अल्पसंख्यकों के हितों को पूरे जोर शोर से उठाने लग जाते हैं। अल्पंसख्यकों के मुददे उठाते समय इन सभी दलों को देशहित व समाजहित की कतई चिंता नहीं रहती है। लेकिन जब हमारे ही पड़ोसी देश बांग्लादेश वा पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू अल्पंसख्यकों पर अत्याचार होते हैं तब कोई अल्पसंख्यकवादी नेता, बुद्धिजीवी व मानवाधिकारी उनके हितों की रक्षा करने के लिए आगे नहीं आता। यह एक अजब राजनैतिक व सामाजिक नियति है। Read More

शिक्षा की उपेक्षा से स्थिति विस्फोटक होने की आशंका
धर्मपाल सिंह

शिक्षा सरल, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण हो। शिक्षा का व्यापारीकरण रुकना चाहिए। छात्राओं को निशुल्क शिक्षा मिलनी चाहिए। सेल्फ फाइनेंस कोर्स में शुल्क के मानक निर्धारित हों और उसी के अनुसार शुल्क लिया जाए। हम शिक्षा क्षेत्र में निजी कालेजों के विरोधी नहीं हैं किन्तु उनमें शुल्क का निर्धारण सरकार करे। शिक्षा पर व्यय बढाया जाना चाहिए।   Read More

हिन्दू राष्ट्र पहला और अन्तिम लक्ष्य
डा. चारुदत्त पिंगल

सम्पूर्ण विश्व में हिन्दुओं का कोई भी राष्ट्र ऐसा नहीं है जिसे हिन्दू राष्ट्र कहा जाए। सभी धर्मों इस्लाम, ईसाइयत, बौद्ध, यहूदी के देश हैं, लेकिन कोई भी हिन्दू राष्ट्र नहीं है। यही सबसे बड़ी चुनौती है। विधिवत हिन्दू राष्ट्र बनाना ही प्रमुख चुनौती है। दूसरी चुनौती यह है कि हिन्दुओं को देश में धर्म शिक्षा देना प्रतिबंधित किया गया है, जबकि अन्य धर्मों को धार्मिक शिक्षा देने की छूट है। Read More

कालेधन के खिलाफ ऐतिहासक जंग   
मृत्युंजय दीक्षित

Mritunjay Dixit मृत्युंजय दीक्षित प्रधानमंत्री नरंेद्र मोदी ने विबत 8 नवंबर को टी. वी. पर देश को संबोधित करते हुए जब 500 व एक हजार के नोट बंद करने का ऐलान कर दिया ओैर उनका उपयोग सीमित स्थानों पर सीमित दिनों के लिए कर दिया उसके बाद देश की जनता व राजनैतिक दलों में काफी तेज हलचल होना स्वाभाविक था।  Read More

गो रक्षा और संतो का बलिदान   
सर्वेश कुमार सिंह

इस वर्ष की गोपाष्टमी 7 नवम्बर को गाय के लिए असंख्य संतों के बलिदान को पचास वर्ष पूरे हो रहे हैं। जब उन्होंने इसी तारीख को 1966 में गाय की रक्षा के लिए संसदवन पर विशाल प्रदर्शन किया था। पुरी के शंकराचार्य निरंजनदेव तीर्थ, प्रयाग के प्रमुख संत प्रभुदत्त ब्रह्मचारी, स्वामी करपात्री जी महाराज और जैन मुनि सुशील कुमार के नेतृत्व में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सभा कर रहे देशभर के संतों और अन्य गोक्तों पर पुलिस ने बर्बर अत्याचार किया था। पुलिस ने निहत्थे संतों और जनता पर गोली चलायी थी। Read More

गोरक्षा या गोरखधंधा
विजय कुमार 

Vijai Kumar, Vishva Hindu Parishad VHPगत छह अगस्त को नरेन्द्र मोदी ने अपने टाउनहाल भाषण नामक कार्यक्रम में गोरक्षकों के संदर्भ में गोरखधंधा और गोरक्षा की दुकानें जैसी गंभीर टिप्पणियां की हैं। वे मानते हैं कि कुछ लोग रात में किये जाने वाले काले धंधे छिपाने के लिए दिन में गोरक्षक का चोला पहन लेते हैं। उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया है कि वे ऐसे लोगों के कच्चे चिट्ठे तैयार कर उन्हें समुचित दंड दें। Read More

आध्यात्मिक चेतना के संवाहक अरविन्द
मृत्युंजय दीक्षित

Mritunjay Dixit मृत्युंजय दीक्षित श्री अरविंद का जन्म ऐसे समय में हुआ था जब परे देश मंे अंग्रेजों का राज स्थापित हो चुका था। पूरे देश में अंग्रेजियत व अंग्रेजों का बोलबाला था। उन दिनों देश में ऐसी शिक्षा दी जा रही थी जिससे शिक्षित भारतवासी काले अंग्रेज बन रहे थे। उन दिनों बंगाल में एक बहुत लोकप्रिय चिकित्सक थे उनका नाम था डा.कृष्णन घोष। वे अपने कार्य में बहुत कुशल व उदार थे। दुख में हर एक की सहायता करना उनका काम था। उनके घर में पूर्णरूपेण अंग्रेजी वातावरण था। इन्हीं डा.घोष के घर पर 15 अगस्त 1872 को श्री अरविंद ने जन्म लिया। अरविंद शब्द का वास्तविक अर्थ कमल है। Read More

पतंगबाजी ना बने तिरंगे के अपमान की वजह
शालिनी श्रीवास्तव
Shalini Srivastav, शालिनी श्रीवास्तवहर साल स्वतंत्रता दिवस भाषणों में गुजर जाता है। इस साल भी इससे ज्यादा की उम्मीद तो नहीं, लेकिन यह जरूर है कि देश के प्रधानमंत्री से अच्छे दिनों की आस अब भी बाकी है। ऐसा लगता है मानो अच्छे दिन जल्द ही आएंगे, बदलाव जरूर आया है लेकिन उसकी रफ़्तार अभी धीमी है। Read More
महान क्रांतिकारी-ऊधम सिंह
मृत्युंजय दीक्षित

Mritunjay Dixit मृत्युंजय दीक्षित जलियांवाला बाग हत्याकांड का प्रतिशोध लेने वाले क्रांतिकारी ऊधम सिंह का जन्म 29 दिसम्बर 1869 को सरदारटहल सिंह के घर पर हुआ था। ऊधम सिंह के माता -पिता का देहांत बहुत ही कम अवस्था मंे हो गया था। जिसके कारण परिवार के अन्य लोगो ने उन पूरा ध्यान नहीं दिया। काफी समय तक भटकने के बाद अपने छोटे भाई के साथ अमृतसर के पुतलीघर में शरण ली जहां एक समाजसेवी संस्था ने उनकी सहायता की। Read More

तीर्थाटन के पर्यटन में बदलने से मैली हो रही गंगा
भूपत सिंह बिष्ट

Bhupat Singh Bistगोमुख ग्लेशियर के तेजी से पिघलने पर सरकार ने रस्म अदायगी का बयान जारी किया है इस से गंगा मां को लेकर चिंतायें घिर आयीं हैं। राष्ट्रीय नदी, ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर गंगा की उद्गम स्थली गोमुख का उजड़ना सामान्य नहीं है। उमा भारती के संवेदनशील नेतृत्व में गंगा की सफाई का अभियान अरबों रुपयों को होम करने की कवायद भर नहीं, बल्कि मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि बनने वाला कार्यक्रम है। Read More

स्वाती सिंहः महिला स्वाभिमान की प्रतीक
डा. शक्ति कुमार पाण्डेय

प्रदेश में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है पार्टियाँ नये नये हथकण्डे अपना रही हैं। माहौल को अपने पक्ष में करने की नयी नयी तरकीबें सोची जा रही हैं। कभी कभी इस प्रयास में देश, समाज और मानवीय मूल्यों की भी उपेक्षा हो जाती है। एक भाजपा नेता की जुबान क्या फिसली कि बसपा में भूचाल आ गया।Read More

सिन्धु दर्शनः एक भारत, सारा भारत का निहितार्थ
अशोक कुमार सिन्हा
Ashok Sinha अशोक सिन्हाभारतीय जीवनमूल्य का परिचय सिन्धु नदी हैं | सिन्धु ने भारतवर्ष पर हुए अनेकों आक्रमणों को रोका है | हिन्दू, हिंदिया या हिन्दुस्थान का सम्बन्ध देश की प्राचीन नदी सिन्धु से है जो सुदूर उत्तरी हिमालय कैलाश-मानसरोवर से अपने सिंह मुखी उदगम श्रोत से निकल कर कुल 2440 किलोमीटर लम्बी यात्रा तै करते हुए अरब सागर में जा कर मिल जाती हैं |
मायावती का सम्मान बनाम अन्य महिलाएं
सर्वेश कुमार सिंह

बहुजन समाज पार्टी की नेता सुश्री मायावती के सम्मान का मुद्दा अब ' मायावती का सम्मान बनाम अन्य महिलाओं के सम्मान ' में तब्दील हो गया है। क्योंकि, मायावती पर आपत्तिजनक टिप्पड़ी के एवज में उनके समर्थकों ने आरोपी दयाशंकर सिंह के परिवार की महिलाओं का अपमान करना शुरु कर दिया है। सार्वजनिक मंच से उनके परिवार की महिलाओं, बहन-बेटी के लिए अपशब्द बोले गए। यह उतना ही निन्दनीय है जितनी मायवती पर की गई टिप्पडी। समाज और राज्य व्यवस्था में ' अपराध के बदले अपराध ' की छूट नहीं है।Read More

क्या चेतावनी से सुधरेंगे समाजवादी ?
मृत्युंजय दीक्षित

अब समाजवादियों को चेतावनी मिलनी शुरू हो गयी है। इस बार चेतावनी किसी बाहरी नेता ने नहीं अपितु समाजवादी मुखिया सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने ही दे डाली है। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव जब पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर कि नौवीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे तभी उन्होनें अपने लोगों को आगाह करते हुए कहाकि Read More

नयी कांग्रेस की आवश्यकता
विजय कुमार 

Vijai Kumar, Vishva Hindu Parishad VHPपिछले कुछ समय से कांग्रेस में संकट लगातार गहराता जा रहा है। यों तो उतार-चढ़ाव हर राजनीतिक दल में आते रहते हैं। दल बनते और बिगड़ते भी रहते हैं; लेकिन कांग्रेस का यह संकट उसके समर्थकों ही नहीं, उन विरोधियों के लिए भी चिंता का कारण बन गया है, जो देश से वास्तव में प्रेम करते हैं। Read More

बांग्लादेश का उचित निर्णय
सर्वेश कुमार सिंह

बांग्लादेश सरकार ने राष्ट्रहित में दो महत्वपूर्ण फैसले किये हैं। दोनों फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा एवं समाजिक एकता के लिए कैबिनेट कमेटी ने लिये हैं। बांग्ला सरकार ने फैसला किया है कि देश में जुमे (शुक्रवार) को नमाज के बाद होने वाली तकरीर (धार्मिक भाषण) की निगरानी की जाएगी। Read More

अब है असली चुनौती
विजय कुमार
Vijai Kumar, Vishva Hindu Parishad VHPपांच राज्यों के चुनाव परिणाम आ गये हैं। इनसे भाजपा का उत्साह बढ़ा है। कांग्रेस के फूटे डिब्बे में दो छेद और बढ़ गये हैं। केरल की जीत पर वामपंथी भले ही खुश होंय पर उनका बंगाली गढ़ ध्वस्त हो गया है। अब वहां उनकी वापसी कठिन है। Read More
सोयाबीन बनेगा चम्बल का सम्बल
इंदल सिंह भदौरिया

बीहड़, बागी और बन्दूक के त्रिशूली आघात को सहती समूची चम्बल घाटी अब सोयाबीन की खेती से अपनी माली हालत सुधारेगी। इस सम्भावना का सूत्रपात चम्बल संभाग के मुख्यालय मुरैना में सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र द्वारा संचालित क्रान्तिकारी कृषि योजनाओं के संचालन से हो रहा है।read more

श्री हनुमान जयन्ती और चमत्कारिक सत्य घटना
नरेन्द्र सिंह राणा
आगामी 22 अप्रैल 2016 दिन शुक्रवार को परमात्मा जो त्रेता में राम बन कर आये उन्होंने चराचर के कल्याण हेतु अनको लीलाएं की और मर्यादापुरूषोत्तम कहलाएं। ऐसे परमपिता परमात्मा श्री राम के अन्नय भगत श्री हनुमान जी की जयन्ती है।read more
यूपी की जमीनी हकीकत को समझे भाजपा
योगेश जादौन

Yogesh Jadonदेशी कहावत है बिच्छू का मंत्र नहीं आता और सांप के बिल में हाथ देने चले। देशी इसलिए कि कभी स्वदेशी-स्वदेशी चिल्लाने वाली भाजपा को आज न तो देशी भाव समझ में आ रहे हैं और न भंगिमा। उसकी भाव-भंगिमा दोनों ही बिगड़ी हुई हैं। दिल्ली के बाद बिहार ने उसकी हालत ने उसका संतुलन बिगाड़ दिया है। read more

राजनीतिक सुनामीः पनामा पेपर्स लीक्स
के.पी.सिंह

नामा पेपर्स ने पूरी दुनिया को सुनामी जैसे राजनैतिक, सामाजिक ज्वार की चपेट में ला दिया है। इन दस्तावेजों ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कैमरून के अलावा रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिन पिंग के नजदीकियों के साथ-साथ 12 वर्तमान और पूर्व राष्ट्र प्रमुखों के अपतटीय निवेश का खुलासा किया है। read more

सामाजिक समरसता के प्रेरकः डा. भीमराव अम्बेडकर
मृत्युंजय दीक्षित

भारतीय संविधान क निर्माता व सामाजिक समरसता के प्रेरक भारतरत्न डा.भीमराव अम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को महू मध्यप्रदेश में हुआ था। इनके पिता श्री रामजी सकपाल व माता भीमाबाई धर्मप्रेमी दम्पति थे। अम्बेडकर का जन्म महार जाति में हुआ था। read more

राहुल सांकृत्यायन अनूठा व्यक्तित्व थे
के पी सिंह

डा.हजारी प्रसाद द्विवेदी अपने आप में विद्वता के हिमालय थे लेकिन एक बार राहुल सांकृत्यायन का जिक्र छिड़ा तो उन्होंने कहा कि मैं किसी भी सभा में धारा प्रवाह बोल सकता हूं लेकिन जिस सभा में राहुलजी होते हैं उसमें बोलते हुए उन्हें सहम जाना पड़ता है। राहुलजी के पास इतनी जानकारियां और ज्ञान है कि उनके सामने मुझे अपना व्यक्तित्व बौना दिखने लगता है। read more

बदल चुकी है 36 बसंत देख चुकी भाजपा
श्रीधर अग्निहोत्री

अपने जन्म के 36 बसन्त देख चुकी भारतीय जनता पार्टी ने अपने जीवनकाल मेें कई उतार चढाव देखे। कभी वह सत्ता से दूर रही तो कभी सत्ता में कभी सरकार में रही तो कभी बाहर रहकर समर्थन दिया। लेकिन भाजपा के स्वभाव में जो परिवर्तन 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद लोगों को लगा कि अब तो भाजपा पूरी तरह से बदल चुकी है।हालांकि आज की भाजपा का जन्म तो 1951 में जनसंघ के रूप् में डा श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कानपुर के ऐतहासिक फूलबाग में मैदान में अटल विहारी वाजपेयी की उपस्थिति में की थी लेकिन उस समय कांग्रेस के जमाने में जनसंघ संघर्ष ही करती दिखी।

कांग्रेस की आग में भाजपा ने जलाए हाथ
भूपत सिंह बिष्ट

BS Bistदेहरादून। अगले वर्ष उत्तरप्रदेश के साथ उत्तराखंड में भी विधानसभा चुनाव होने हैं और छह माह के भीतर इस पहाड़ी राज्य में चुनावी आचार संहिता घोषित होनी है। ऐसे में कांग्रेस की बगावत में हाथ सैंकने के फेर में भाजपा कहीं हाथ तो नही जला बैठी है - यही यक्ष प्रश्न भाजपा के भावुक समर्थकों को विचलित कर रहा है। बागी कांग्रेसी विधायकों के पक्ष में तिकड़म लड़ाती हाईकमान के रुख से पुराने सिंद्धातवादी निराशा व्यक्त करते हैं।

स्काटलैण्ड की जंगे आजादी अभी खत्म नहीं हुई
के. विक्रम राव
Publised on : 20  September 2014 Time: 22:55
स्काटलैण्ड में ब्रिटेन की हर सत्तारूढ़ पार्टी संसदीय निर्वाचन में पराजित होती रही। केवल एक सीट मिलती रही, मारग्रेट थैचर से डेविड कैमरून तक क्योंकि विपन्न स्काटलैण्ड समतामूलक संघर्ष की उर्वरा भूमि रही जो ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से टकराती रही।read more
संघ की व्यक्ति निर्माण योजना का चमत्कार हैं मोदी
प्रवीण दुबे
Publised on : 28 May 2014 Time: 22:58
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अर्थात विश्व का सर्वाधिक विशाल गैर राजनैतिक, सामाजिक संगठन। एक ऐसा संगठन जिसे व्यक्ति निर्माण की पाठशाला कहा जाता है। 88 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय इस संगठन ने राष्ट्र निर्माण, देशभक्ति, सेवा और भारतीय पुरातन मूल्यों की स्थापना का कार्य कभी नहीं छोड़ा। read more
सच्चाई का प्रतीक होते हैं आँसू
- डॉ दीपक आचार्य-
Publised on : 28 May 2014 Time: 22:55
आँसू और पवित्रता के बीच गहरा रिश्ता है। ये एक-दूसरे के पर्याय हैं। आँसू अपने आप में इतने पवित्र होते हैं कि इनसे ज्यादा शुचिता किसी और द्रव में कभी हो ही नहीं सकती। ये केवल बूँदें नहीं होती बल्कि इंसान के मन-मस्तिष्क का वो सार होती हैं जिसमें सच्चाई का खजाना छिपा होता है। read more
क्या हम बुलेट रेल के लिये तैयार हैं
- शिवाजी सरकार -
Publised on : 28 May 2014 Time: 22
रीब आदमी भी तेज गति का षौकीन है। आने वाली नई सरकार ने उसमें उम्मीदें भी जगा दी हैं। स्वाभाविक है कि वह भी धरती पर तेज गति से दौड़ती बुलेट रेल में यात्रा करने का सपना देख रहा है। लेकिन क्या हमें तुरन्त बुलेट रेल की आवष्यकता है? षायद नहीं। देष अभी कुछ ओर साल भारतीय रेल में गुजार सकता है। read more
मोदी ने बनारस में बनाये रखा रस
डा दिलीप अग्निहोत्री
Publised on : 25 April 2014 Time: 16:33
बड़े नेताओं के नामांकन मंे भारी भीड़ का होना सामान्य बात है। कई दबंग, माफिया प्रत्याशी अपनी दम पर भी भीड़ जुटाने की क्षमता रखते हैं। फिल्मी कलाकारों के नाम पर सड़कें जाम हो जाती हैं। लेकिन चैबीस अप्रैल को वाराणसी से भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी के नामांकन का नजारा बिल्कुल अलग ढंग का था। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि इस दिन वाराणसी मोदीमय थी। इसे भीड़ नहीं कहा जा सकता। read more
मुस्लिमों में भय समाप्त करने के लिए मोदी की साहसिक पहल
मृत्युंजय दीक्षित
Publised on : 19 April 2014 Time: 14:03
वर्तमान लोकसभा चुनावों में मुस्लिम मतों की सियासत कुछ अधिक ही तेज हो गयी है। देष के सभी राष्ट्रीय क्षेत्रीय दलों ने पूरी तरह से केवल मोदी को रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। इसलिए उन्हें केवल एकमुष्त मुस्लिम वोटों की ही दरकार रह गयी है। आज देष में ऐसे हालात पैदा हो गये हैं कि गुजरात में 2002 के दंगों के अलावा कोई और बड़ा मुददा ही नहीं रह गया है। हर पार्टी का नेता अपने आप को मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी और मोदी को गुजरात दंगों का अपराधी घोषित करने में लग गया है।  
वर्तमान परिदृश्य में मीडिया और समाज
डॉ सरिता पाण्डेय
प्रेस को समाज के आँख और कान कहा गया है, क्यों कि अन्य संचार साधनों के समान ही यह नागरिकों को सूचनायें प्रदान करने में अत्यंत शक्तिशाली भूमिका निभाता है।लोकतांत्रिक राज्यतंत्र में जानकारी प्राप्त करते रहने का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है। जानकारी और पर्याप्त सूचनाओं की सहायता से ही वह निर्णय निर्माण प्रक्रिया में अपनी निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। इसी के परिणामस्वरूप व्यक्ति को राजनीतिक व्यवस्था में उचित स्थान प्राप्त होता है।
अस्थिरता पैदा करने वालों को नकारना होगा
जयकृष्ण गौड़

आरोप-प्रत्यारोपों की बौछार में यह समझना कठिन है कि कौन सच्चा और कौन झूठा है, लेकिन इस चुनाव में महत्वपूर्ण चिंता कांगे्रस की है। कांग्रेस के शहजादे राहुल गांधी चैपाले लगाकर राजनीति का पाठ पढ़ रहे है, जो स्वयं को कांग्रेस का नेता मानते है, वे कपिल सिब्बल, अमिन्दर सिंह, अंबिका सोनी ने हिचकते हुए चुनाव लडना स्वीकार किया है। मनीष तिवारी ने तो चुनाव लडने से इंकार ही कर दिया है।

व्यंग्यः इंसान किस्म-किस्म के
शालिनी श्रीवास्तव,
सबको मालूम है कि आम कि हज़ारों किस्में है | वैसे ही इंसानों कि भी लाखों -करोड़ों किस्में है जैसे -ऊँचा आदमी ,नीचा आदमी ,लम्बा आदमी ,नाटा आदमी ,गोरा आदमी ,काला आदमी , विशिष्ट आदमी ,गुमनाम आदमी  ,गोल आदमी ,चपटा आदमी , बड़ा आदमी, छोटा आदमी ,सीधा आदमी ,तिरछा आदमी ,अमीर आदमी ,भिखमंगा आदमी आदि आदि | read more
दशरथ माँझी-प्रेम और पुरुषार्थ की प्रतिमूर्ति
डॉ. ओ. पी. मिश्र
दशरथ माँझी द्वारा निर्मित मार्ग हजारों-लाखों किसानों, विद्यार्थियों, बीमारों, व्यापारियों आदि के लिए बहुत उपयोगी है। क्या उपयोगिता सौंदर्य पर भारी नहीं है। read more
भ्रष्टाचार माया राज का, मुसीबत अखिलेश की
सर्वेश कुमार सिंह
भ्रष्टाटार में लिप्त रहे मायावती सरकार के अफसरों को बचाना अखिलेश यादव के भारी  पड़ रहा है। इन अफसरों को अपने इर्दगिर्द तैनात करके अखिलेश यादव ने मुसीबत मोल ले ली है। अब इनके जांच में फंसने पर आनन फानन में इन्हें हटाया गया है।
उत्तराखंड की नंदा राजजात यात्रा अब अगले साल होगी !
भूपत सिंह बिष्ट
29 अगस्त से प्रस्तावित श्री नंदा राजजात यात्रा का कार्यक्रम अब अगले साल के लिये टाल दिया गया है। नंदाराजजात समिति के अध्यक्ष डा0 राकेश कुंवर की इस घोशणा के बाद उत्तराखंड राज्य की पतली हालात और बेबस सरकार की मजबूरी जग - जाहिर हुई है। पर्यटन मंत्री अमृता रावत निरंतर इस यात्रा को टालने की गुजारिश आयोजन समिति से कर रही थी।
कांग्रेस, कोयला और कालिख 
Anil Saumitra
कांग्रेस के नेता भले ही कुछ भी कहें, उनके प्रवक्ता मीडिया में कुछ भी बोलें, वे चाहे कितनी ही सफाई क्यों न दें- एक बात तो पक्की है- कांग्रेस बदनाम हो गई है।
अन्ना का राजनैतिक विकल्प सभी दलों के लिये खतरा
-आनन्द शाही- Anand Shahi
यह भारतीय लोकतंत्र के अभ्युदय का वह दौर है जिसमें यदि जनता सच व झूठ के प्रति सच में संवेदनशील हो गई तो वह दिन दूर नहीं कि शांति और अहिंसा के दम पर सत्ता का बदलाव समग्र कांति के आंदोलन से कई कदम आगे का एक ऐतिहासिक आंदोलन सिद्ध होगा
रेडियो नाटकों का यह कैसा मंचीय रूप?
कृष्णमोहन मिश्र
कुछ समय पूर्व आकाशवाणी, लखनऊ द्वारा स्थानीय एक प्रेक्षागृह में आमंत्रित श्रोताओं के समक्ष रेडियो नाटकों की प्रस्तुतियाँ की गई थी। इस आयोजन में मेरे जैसे कई दर्शक थे जो एक अन्तराल के बाद आकाशवाणी के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
भक्ति आंदोलनः पुनर्पाठ
डॉ॰ वेदप्रकाष अमिताभ
ध्यकालीन भक्ति-आंदोलन समन्वय की विराट चेश्टा है, विरूद्धों का सामंजस्य है और हमारी साझी संस्कृति का वटवृक्ष है। विद्वान इतिहासकार प्रोफेसर ाहाबुद्दीन इराकी ने अपनी कृति मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन (सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य) में भक्ति विचारधारा और आंदोलन की विभिन्न धाराओं एवं समाज पर उसके प्रभाव का ऐतिहासिक संदर्भ में वस्तुनिश्ट विष्लेशण किया है।
लखनऊ संगीत-शिक्षा-परम्परा का सूत्रधार : बली परिवार
कृष्णमोहन मिश्र

वध के नवाब वाजिद अली शाह 1847 से 1856 तक अवध के शासक रहे। उनके कार्यकाल में ही "ठुमरी" एक शैली के रूप में विकसित हुई थी। उन्हीं के प्रयासों से कथक नृत्य को एक अलग आयाम मिला और ठुमरी, कथक नृत्य का अभिन्न अंग बनी। नवाब ने 'कैसर' उपनाम से अनेक गद्य और पद्य की स्वयं रचनाएँ भी की। इसके अलावा अख्तर' उपनाम से सादरा, ख़याल, ग़ज़ल और ठुमरियों की भी रचना की थी।

माया मनमोहन तो जरूर जायेंगे
-नरेन्द्र सिंह राणा-

6 मार्च को उ0प्र0 के चुनावी नतीजे चाहे जैसे आएं मुख्यमंत्री मायावती व देश के प्रधानमंत्री मनमोहन ंिसंह का जाना अवश्यमभावी है। सवाल यह है कि उ0प्र0 चुनाव में भाजपा, माया और मुलायम तो चुनावी दंगल में लड़े हैं परन्तु मनमोहन सिंह को अपना पद किस खता के लिए गवाना पडे़गा यह रोचक एवं रहस्यमयी प्रश्न है।

क्या निर्वाचन आयोग चुनावों में धनबल का प्रयोग रोक सकेगा?
-डा0 एस0 के0 पाण्डेय-

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के गठन के लिये चुनाव हो चुके हैं। हमारे सम्मानित पाठक जब यह लेख पढ़ रहे होंगे तो निश्चय ही मतगणना भी हो चुकी होगी और परिणाम भी सामने होंगे। भारत निर्वाचन आयोग अपनी पीठ थपथपा रहा होगा कि शाँतिपूर्ण व निष्पक्ष चुनाव सम्पन्न करा लिया गया। प्रसन्नता की बात है कि तमाम प्रचार-प्रसार का लाभ दिखा और मतदान प्रतिशत बढ़ा।

 पापों का हरण करती है मोक्षा एकादशी
साभार कल्याण
यूं तो सभी एकादशी मानवजगत को श्रेष्ठ फल देने वाली तथा उसके कष्टों को निवारण करने वाली हैं। कि्तु इसमें भी मोक्षा एकादशी का महत्व सबसे ज्यादा है। यह मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जोकि मोक्षा एकादशी के नाम से जानी जाती है।
खतरनाक चुनावी स्टंट
हृदयनारायण दीक्षित

घेराव में फंसा हाथी बड़ा उत्पात मचाता है, तोड़फोड़ करता है, घरों और वृक्षों को भी तहस-नहस कर देता है। तमाम आरोपों से घिरी उत्तार प्रदेश की मुख्यमत्री मायावती ने चुनावी साल में उत्तार प्रदेश को चार खंडों में तोड़ने का प्रस्ताव किया है। उत्तार प्रदेश के बुंदेलखंड में अकाल और भुखमरी है, रोटी-रोजी की कौन कहे पेयजल का भी अभाव है। पूर्वाचल की गरीबी और व्यथा भयावह है।

एकात्म मानववाद के प्रणेताः पं. दीनदयाल उपाध्याय
उ.प्र.समाचार सेवा
एकात्म मानववाद के रूप में पं.दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय राजनीति को अद्भुत चिंतन दिया। उन्होंने समाज जीवन में गहरे उतर कर भारतीय राजनीति और आध्यात्म का समन्वय किया।
भगवान विश्क र्मा जिन्होंने संसार को शिल्पकलासे अलंकृत किया
संकलन सचिन धीमान
भगवान विश्कर्मा  विश्व के रचयिता, जन-जन की जीविका की कला के प्रणेता, पालनकर्ता एवं जीवनदाता हैं। उन्होंने अपनी शिल्पकला से संसार को अलंकृत किया है। वे देश, काल, जाति और धर्म की सीमाओं से परे, सम्पूर्ण मानव जाति के हितकारी एवं लोकपूज्य है।
स्वयं गीत गाती कविताएं है ऋचा
हृदयनारायण दीक्षित

ीत और काव्य भाव जगत का सौन्दर्य हैं। गीत गाए जाते हैं, कविताएं भी। इसीलिए कवियों और गीतकारों की प्रतिष्ठा है। लेकिन वैदिक कविताएं साधारण कविता नहीं है। उन्हें कविता कहना भाषा की विवशता है। ऋषियों के सामने ऐसी कोई विवशता नहीं थी।

अन्ना'' केहि विधि जीतहॅु रिपु बलवाना
नरेन्द्र सिंह राना
'युगों-युगों से न्याय और अन्याय, धर्म-अधर्म, सत्य-असत्य, साधु-असाधु, विष-अमृत व जीवन-मृत्यु के बीच अनवरत संघर्ष होता आया है। आज भी हो रहा है। देश काल परिस्थिति के अनुसार पात्र बदल जाते हैं परन्तु परिणाम कभी नहीं बदलता वह अटूट, अटल व अडिग होता है।
'वन्देमातरम' गीत का एक नवीन प्रयोग
कृष्णमोहन मिश्र
मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग एवं उस्ताद अलाउद्दीन खाँ संगीत कला अकादमी के संयुक्त प्रयासों से प्रतिवर्ष चन्देल राजाओं की संस्कृति-समृद्ध भूमि- खजुराहो में महत्वाकांक्षी- 'खजुराहो नृत्य समारोह' आयोजित होता है। इस वर्ष के समारोह की तीसरी संध्या में 'भरतनाट्यम' नृत्य शैली की विदुषी नृत्यांगना डाक्टर ज्योत्सना जगन्नाथन ने अपने नर्तन को 'भारतमाता की अर्चना' से विराम दिया।
खबरों में मिलावट है पाठकों से धोखाधड़ी
डा. रवीन्द्र अग्रवाल

नीा राडिया टेप प्रकरण में जो टेप अब तक उजागर हुए हैं उनसे जाहिर है कि कुछ ख्यातिनाम पत्रकार इस कार्पोरेट लॉबिस्ट की जी-हुजूरी में जुटे रहने में ही अपनी शान समझते थे। इस कार्पोरेट लॉबिस्ट के लिए बड़े कहे जाने वाले अखबारों की औकात किसी छुटभइयै से ज्यादा नहीं है।

पंचायत से पार्लियामेन्ट तक के चुनाव का सच

नरेन्द्र सिंह राना

भारत का जन-जन चाहता है कि देश में सभी चुनाव हों वहीं वे यह भी चाहते हैं कि सभी स्तरीय चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हों, मतदाता निर्भीकता से अपने मताधिकार का प्रयोग करें। मतगणना में धांधली न हो जिससे उनका विश्वास चुनाव पध्दति पर बढ़े न कि घटे।...........Full Article

दीपावली और पर्यावरण

विजय कुमार 

हर बार की तरह इस बार भी प्रकाश का पर्व दीपावली सम्पन्न हो गया। लोगों ने जमकर आनंद मनाया; घर और प्रतिष्ठान सजाए; मिठाई खाई और खिलाई; उपहार बांटे और स्वीकार किये; बच्चों ने पटाखे और फुलझड़ियां छोड़ीं; कुछ जगह आग भी लगी; पर दीप पर्व के उत्साह में यह सब बातें पीछे छूट गयीं।

पापांकुशा एकादशी : समस्त कष्टों से मुक्ति औप मोक्ष प्रदान करती है

साभारःकल्याण

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापाकुंशा एकादशी ने नाम से जानते हैं। यह एकादशी मनुष्यों को समस्त पापों एवं कष्टों से मुक्ति प्रदान करती है तथा मोक्ष भी प्रदान करती है। इस एकादशी का व्रत तथा इसका महात्म महाभारत में स्वयं भगवान वासुदेव ने युधिष्टिर को बताया है। ...........Full Article

शक्ति ही तो शान्ति का आधार है
शान्ति की आकांक्षा किसे नहीं होती; मानव हो या पशु, हर कोई अपने परिवार, मित्रों और समाज के बीच सुख-शांति से रह कर जीवन बिताना चाहता है। विश्व के किसी भी भाग में सभ्यता, संस्कृति, साहित्य और कलाओं का विकास अपनी पूर्ण गति से शांति-काल में ही हुआ है; लेकिन इस धारणा को स्वीकार कर लेने के बाद, यह भी सत्य है कि सृष्टि के निर्माण के समय से ही शांति के साथ-साथ अशांति, संघर्ष, प्रतिस्पर्धा और उठापटक का दौर भी चलता रहा है। ...........Full Article

इनका दर्द भी समझें

मेरे पड़ोस में मियां फुल्लन धोबी और मियां झुल्लन भड़भूजे वर्षों से रहते हैं। लोग उन्हें फूला और झूला मियां कहते हैं। 1947 में तो वे पाकिस्तान नहीं गये; पर मंदिर विवाद ने उनके मन में भी दरार डाल दी। अब वे मिलते तो हैं; पर पहले जैसी बात नहीं रही। अब वे दोनों काफी बूढ़े हो गये हैं। फूला मियां की बेगम भी खुदा को प्यारी हो चुकी हैं।Full Article

 
   
 
 
                               
 
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