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UP: किसानों के 36359 करोड़ के कर्ज माफ
भाजपा सरकार ने लोक संकल्प पत्र में किया वादा पूरा किया, पहली केबिनेट बैठक में लिया कर्ज माफी का फैसला
सर्वेश कुमार सिंह
Tags: #Yogi Adityanath,CM UP, Farm loan waved in UP, Cabinet Meeting
Publised on : Last Updated on: 04 April 2017, Time 17:10

Lucknow लखनऊ, 04 अप्रैल, 2017। (उ.प्र.समाचार सेवा)। उत्तर प्रदेश सरकार ने विधान सभा चुनाव के दौरान किये गए वादे के अनुरूप कैबिनेट की पहली बैठक में लघु और सीमान्त किसानों के 36 हजार 359 करोड़ रुपये के ऋण माफ कर दिये हैं। इन कर्जों को प्रदेश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया है। बैंकों को यह धनराशि प्रदेश सरकार अपने खजाने से अदा करेगी। करज माफी योजन के तहत प्रदेश सरकार किसानों के एक लाख रुपये तक के ऋण माफ करेगी। इस रकम को जुटाने के लिए सरकार ने किसान बाण्ड जारी करने का फैसला किया है।
लोकभवन सचिवालय में आयोजित कैबिनेट की पहली बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ Yogi Adityanath की अध्यक्षता में किसानों के कर्जे माफ करने का निर्णय लिया गया। इस फैसले की जानकारी शाम को लोकभवन सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में सरकार के प्रवक्ताओं सिद्धार्थनाथ सिंह और श्रीकांत शर्मा ने दी। प्रवक्ताओं ने बताया कि प्रदेश में 2 करोड़ 30 लाख किसान हैं। इनमें 92.5 प्रतिशत यानि कि 2 करोड 15 लाख सीमान्त और लघु किसान हैं। इनके द्वारा लिए गए फसली ऋण में एक लाख रुपये सीमा तक का ऋण माफ किया गया है। यह धनराशि 30 हजार 729 करोड़ रुपये है। सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों तथा सहकारी बैंकों से लिए गए कर्ज को माफ किया गया है। माफी 31 मार्च 2017 तक के फसली ऋणों पर की गई है। किसानों के एक लाख रुपये तक के करज माफ किये गए हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि इसके अलावा प्रदेश में 7 लाख और एेसे किसान हैं जिनके ऋण एनपीए ( नान परफार्मिंग एसेस्ट्स) में चले गए हैं। ऐसे किसानों की एनपीए धनराशि 5 हजार 630 करोड़ रुपये है। इन किसानों का यह एनपीए भी सरकार द्वारा बैंकों को भुगतान किया जाएगा। इस धनराशि को सरकार ओटीएस स्कीम के तहत बैंकों को अदा करेगी। इस तरह प्रदेश सरकार ने किसानों को कुल ऋण माफी 36 हजार 359 करोड़ की है। उन्होंने बताया कि इस धनराशि को सरकार अपने संसाधनों से जुटाएगी। इसके लिए किसान बाण्ड जारी किया जाएगा। इस बाण्ड से प्राप्त रकम को किसानों की कर्ज अदायगी में उपयोग किया जाएगा। प्रवक्ता के अनुसार चूंकि केन्द्र सरकार के एफआरबीएम एक्ट में यह प्रावधान है कि किसी भी राज्य का फिसकल डेफिसिट उसकी जीडीपी के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता। इसलिए बाण्ड से पैसा जुटाने की उपाय निकाला गया है।
फसली ऋण माफी योजना के तहत मुख्य सचिव की अध्यकता में आठ अधिकारियों की एक कमेटी बनायी गई है। जिसमें कृषि उत्पादन आयुक्त, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव वित्त, प्रमुख सचिव संस्थागत वित्त एवं कृषि सहकारिता व राज्य की लीड बैंक के समन्वयक को सदस्य बनाया गया है। यह समिति सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद विस्तृत फसली ऋण माफी योजना तैयार करेगी। योजना का मुख्यमंत्री से अनुमोदन लेने के बाद उसका क्रियान्वयन किया जाएगा। साथ ही समिति योजना के वित्त पोषण हेतु भी अपनी संस्तुतियां शासन को प्रस्तुत करेगी। जिसके आधार पर सरकार द्वारा इस हेतु वित्तीय व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। क्रियान्वयन के अतिरिक्त समिति की इस योजना के सतत् अनुश्रवण में बी सक्रिय भूमिका होगी।
जातव्य है कि उत्तर प्रदेश 78 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण केत्रों में निवास करती है, जिसमें 68 प्रतिशत परिवार कृषि पर निरभर हैं। प्रदेश में एक हेक्टेयर अरथात 2.5 एकड़ तक क सभी किसान सीमान्त किसान की श्रेणी में आते हैं। जबकि 2 हेक्टेयर यानि कि 5 एकड़ तक के किसान लघु किसान की श्रेणी में आते हैं। प्रदेश में 86.68 लाख किसानों ने बैंकों से फसली ऋण लिया हुआ है।

 

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News source: UP Samachar Sewa

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